जब केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मौजूदगी में मारुति सुजुकी ने वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल को भारत की पहली प्रोडक्शन-रेडी फ्लेक्स फ्यूल कार के रूप में पेश किया, तो पूरे देश का ध्यान एक ही सवाल पर टिक गया: वैगन आर के बाद अगली बारी किसकी है? क्या मारुति सुजुकी स्विफ्ट और डिज़ायर को भी जल्द ही E85 फ्लेक्स फ्यूल वर्शन में लॉन्च करेगी? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें पूरी कहानी को शुरू से समझना होगा।
E85 फ्लेक्स फ्यूल क्या होता है और यह आम पेट्रोल से कैसे अलग है?
फ्लेक्स फ्यूल यानी ऐसा ईंधन जो पेट्रोल और इथेनॉल के किसी भी मिश्रण में चल सके। E85 का मतलब है 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण। यह इथेनॉल गन्ने और मक्के जैसी फसलों से बनाया जाता है, जिससे यह एक नवीकरणीय ईंधन बन जाता है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि E85 पर चलने वाले वाहन से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आती है। मारुति के अपने शोध के अनुसार E85 पर चलने वाली वैगन आर में पारंपरिक पेट्रोल वैगन आर की तुलना में 79 प्रतिशत तक कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन होता है। साथ ही चूंकि इथेनॉल देश में ही बनता है, इसलिए यह तेल आयात पर निर्भरता भी घटाता है और किसानों की आय को भी बढ़ाने में मदद करता है।
मारुति सुजुकी वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल: भारत की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार की पूरी कहानी
इस ऐतिहासिक लॉन्च की नींव काफी पहले रखी जा चुकी थी। मारुति ने दिसंबर 2022 में ही वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप को पेश किया था और वादा किया था कि वे 2025 तक कॉम्पैक्ट सेगमेंट में अपनी पहली फ्लेक्स फ्यूल कार लाएंगे। फिर भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2024 में एक बार फिर वैगन आर का फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप दिखाया गया। आखिरकार 4 जून 2026 को, विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर, मारुति सुजुकी ने प्रोडक्शन-स्पेक वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल को आधिकारिक तौर पर भारत में पेश किया। इसी इवेंट पर हीरो मोटोकॉर्प ने भी अपनी फ्लेक्स फ्यूल स्प्लेंडर और HF डीलक्स मोटरसाइकिल लॉन्च कीं।
वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल की तकनीकी खासियतें जो इसे खास बनाती हैं
प्रोडक्शन-स्पेक वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल के अंदर मारुति का जाना-पहचाना 1.2 लीटर चार सिलेंडर K12N नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन लगाया गया है, लेकिन इसमें कई अहम बदलाव किए गए हैं। इथेनॉल की संक्षारक प्रकृति को संभालने के लिए अपग्रेडेड फ्यूल इंजेक्टर और फ्यूल पंप लगाए गए हैं। नई फ्यूल लाइन और एक खास इथेनॉल सेंसर भी जोड़ा गया है जो यह पता लगाता है कि टंकी में मौजूद ईंधन में इथेनॉल का मिश्रण कितना प्रतिशत है, और उसी के अनुसार ECU यानी इंजन कंट्रोल यूनिट को रियल टाइम में कैलिब्रेट करता रहता है। यह गाड़ी E20 से लेकर E85 तक किसी भी मिश्रण में चल सकती है और तकनीकी रूप से E100 यानी शुद्ध इथेनॉल के लिए भी अनुकूल है, हालांकि अभी इसे CMVR नियमों के तहत E85 तक के लिए ही होमोलोगेट किया गया है।
वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल किसके लिए उपलब्ध होगी और इसकी कीमत क्या होगी?
यहां एक महत्वपूर्ण बात जाननी जरूरी है। अभी के लिए वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल केवल कमर्शियल सेक्टर यानी टैक्सी और फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। प्राइवेट खरीदारों के लिए अभी बुकिंग शुरू नहीं हुई है। कीमत की बात करें तो मारुति ने अभी आधिकारिक कीमत की घोषणा नहीं की है। उम्मीद है कि यह मानक 1.2 लीटर पेट्रोल वैगन आर से 50,000 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक महंगी होगी, क्योंकि फ्लेक्स फ्यूल संगत बनाने के लिए इंजन में जो इंजीनियरिंग बदलाव किए गए हैं उनकी लागत इसी दायरे में आती है। इसकी बाहरी बनावट बिल्कुल सामान्य वैगन आर जैसी ही है, फर्क केवल आगे के दरवाजों पर Flex Fuel बैज और पिछले हिस्से पर BioFuel बैजिंग का है।
भारत में E85 पेट्रोल पंप कब तक आएंगे और क्या यह पेट्रोल से सस्ता होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर गाड़ी E85 पर चल सकती है तो यह ईंधन मिलेगा कहां? पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस बारे में एक स्पष्ट रोडमैप पेश किया है। शुरुआती दौर में दिल्ली-NCR और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में 50 से 100 E85 डिस्पेंसिंग स्टेशन शुरू किए जाएंगे। इसके बाद दिसंबर 2026 तक इन्हें बढ़ाकर 500 स्टेशन किए जाने का लक्ष्य है। और 2027 के अंत तक देश के प्रमुख शहरों में लगभग 5,000 E85 डिस्पेंसिंग स्टेशन स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना है। मंत्री पुरी ने यह भी आश्वासन दिया कि E85 की कीमत मौजूदा E20 पेट्रोल से काफी कम रखी जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को इसे अपनाने में आर्थिक फायदा हो।
वैगन आर के बाद मारुति की अगली फ्लेक्स फ्यूल कार कौन सी होगी?
यह सवाल लाखों लोगों के मन में है और इसका जवाब बेहद दिलचस्प है। मारुति सुजुकी की पैरेंट कंपनी सुजुकी ने अक्टूबर 2025 में जापान मोबिलिटी शो में फ्रॉन्क्स फ्लेक्स फ्यूल कॉन्सेप्ट प्रदर्शित किया था। यह फ्रॉन्क्स का नॉन-टर्बो वर्शन है जिसमें उसी 1.2 लीटर 4-सिलेंडर इंजन का संशोधित रूप लगा है जो E85 ईंधन पर चल सकता है। ऑटोकार इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार फ्रॉन्क्स फ्लेक्स फ्यूल का प्रोडक्शन वर्शन 2026 में ही भारत में लॉन्च होने की उम्मीद है। CarToQ की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मारुति वैगन आर, फ्रॉन्क्स और बलेनो को फ्लेक्स फ्यूल वर्शन में लॉन्च करने की तैयारी में है, और तीनों में वही 1.2 लीटर इंजन है जिसमें E85 संगत बदलाव किए जाएंगे।
स्विफ्ट और डिज़ायर को E85 फ्लेक्स फ्यूल में आने में कितना समय लगेगा?
अब आते हैं उस सवाल पर जिसके लिए आप यहां आए थे। स्विफ्ट और डिज़ायर को लेकर मारुति ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। नई चौथी पीढ़ी की डिज़ायर नवंबर 2024 में लॉन्च हुई थी और उसमें स्विफ्ट का नया Z-सीरीज 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन है। यह इंजन E20 अनुकूल तो है, लेकिन E85 के लिए इसमें वही मेकेनिकल अपग्रेड जरूरी होंगे जो वैगन आर में किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मारुति पहले इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर ध्यान देगी, यानी E85 पंपों की संख्या बढ़ाएगी, और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से अपने अन्य मॉडल जैसे स्विफ्ट, डिज़ायर, ब्रेजा और ग्रैंड विटारा को फ्लेक्स फ्यूल वर्शन में उतारेगी। उद्योग विश्लेषकों के अनुमान के अनुसार स्विफ्ट और डिज़ायर का E85 वर्शन 2027 के अंत तक या 2028 की शुरुआत में आ सकता है, लेकिन यह काफी हद तक E85 ईंधन की देशव्यापी उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
मौजूदा स्विफ्ट और डिज़ायर मालिकों को क्या करना चाहिए?
अगर आपके पास पहले से स्विफ्ट या डिज़ायर है तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। ऑटोकार इंडिया के विशेषज्ञों के अनुसार E85 और E100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण के लिए समर्पित फ्लेक्स फ्यूल इंजन की जरूरत होती है और ये मानक E20 कारों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। लेकिन जब भी ये उच्च ब्लेंड ईंधन बाजार में आएंगे, तो वे मौजूदा E20 पेट्रोल की जगह नहीं लेंगे बल्कि उसके साथ-साथ उपलब्ध रहेंगे। आपकी मौजूदा E20 कार भविष्य में भी बिना किसी समस्या के चलती रहेगी।
अन्य कंपनियां भी फ्लेक्स फ्यूल की दौड़ में हैं, लेकिन मारुति आगे निकल गई
यह देखना बेहद रोचक है कि टाटा मोटर्स ने पंच फ्लेक्स फ्यूल का E100 संगत वर्शन भारत मोबिलिटी शो 2024 में प्रदर्शित किया था। टोयोटा काफी समय से कोरोला फ्लेक्स फ्यूल हाइब्रिड को केंद्रीय मंत्री के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत चला रही है। टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस का E85 फ्लेक्स फ्यूल वर्शन भी 2023 में गडकरी जी ने अनावरण किया था। लेकिन जब प्रोडक्शन में पहले आने की बात आई तो मारुति सुजुकी ने बाजी मार ली और वैगन आर भारत की पहली प्रोडक्शन-रेडी फ्लेक्स फ्यूल पैसेंजर कार बन गई।
भारत सरकार का फ्लेक्स फ्यूल पर दांव और आत्मनिर्भर भारत का सपना
फ्लेक्स फ्यूल की पूरी पहल भारत सरकार के बड़े आर्थिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों से जुड़ी है। भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक भी है। गन्ने और फसल अवशेषों से बना इथेनॉल न केवल किसानों को अतिरिक्त आय देता है बल्कि तेल आयात बिल को भी कम करता है जो हर साल लाखों करोड़ रुपये का होता है। नीति आयोग की Roadmap for Ethanol Blending in India 2020-25 रिपोर्ट में भी इस दिशा में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। मारुति के वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल की लॉन्चिंग इसी बड़े सपने का एक ठोस कदम है।
निष्कर्ष: वैगन आर तो बस शुरुआत है, असली क्रांति अभी आनी बाकी है
भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में जो बदलाव अभी शुरू हुआ है वह आने वाले कुछ वर्षों में पूरे ईंधन परिदृश्य को बदल सकता है। मारुति सुजुकी ने वैगन आर के साथ पहला कदम रख दिया है। फ्रॉन्क्स और बलेनो के फ्लेक्स फ्यूल वर्शन जल्द आने की उम्मीद है। स्विफ्ट और डिज़ायर भी इसी राह पर आगे बढ़ेंगी, बस थोड़ा इंतजार और करना होगा। जब E85 पंप देशभर में फैलेंगे, जब इसकी कीमत पेट्रोल से काफी कम होगी और जब फ्लेक्स फ्यूल इंजन की तकनीक और परिपक्व होगी, तब स्विफ्ट और डिज़ायर जैसी बेस्टसेलर कारें भी इस हरित ऊर्जा क्रांति में शामिल हो जाएंगी। फिलहाल देश गर्व कर सकता है कि दुनिया में पहली बार BS6 मानक वाला फ्लेक्स फ्यूल वाहन सड़क पर उतरा है और वह Made in India है।


