अगर आप भी पेट्रोल के बढ़ते दामों से परेशान होकर इलेक्ट्रिक स्कूटी या बाइक खरीदने का मन बना रहे हैं तो भारत सरकार की PM E-DRIVE योजना आपके लिए एक बेहतरीन मौका लेकर आई है। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक टू व्हीलर खरीदने वालों को सीधे सब्सिडी देकर उनकी जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने की पहल की है। हाल ही में सरकार ने इस योजना से जुड़ी एक बड़ी राहत भरी खबर भी दी है, जिसके बारे में हर खरीदार को जानना जरूरी है।
PM E-DRIVE योजना क्या है और इसे किसने शुरू किया
PM E-DRIVE यानी Prime Minister Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय यानी Ministry of Heavy Industries की एक प्रमुख योजना है। यह योजना अक्टूबर 2024 में शुरू की गई थी और इसका मुख्य मकसद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, ई एम्बुलेंस, ई ट्रक और इलेक्ट्रिक बसों की खरीद पर वित्तीय सहायता दी जाती है ताकि लोग पेट्रोल डीजल वाहनों के बजाय इलेक्ट्रिक विकल्प चुनें। पूरी योजना के लिए सरकार ने 10,900 करोड़ रुपये का बजट तय किया है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा सीधे खरीदारों को सब्सिडी के रूप में और बाकी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में खर्च किया जा रहा है।
स्कूटी और बाइक की खरीद पर असल में कितनी सब्सिडी मिलती है
बहुत से लोगों के मन में यह गलतफहमी है कि इस योजना के तहत वाहन की कीमत का 50 प्रतिशत तक सीधे सब्सिडी के रूप में लौटा दिया जाता है, लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग है। PM E-DRIVE योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर सब्सिडी बैटरी की क्षमता के आधार पर दी जाती है, न कि वाहन की कुल कीमत के प्रतिशत के आधार पर। पहले अप्रैल 2025 से पहले यह सब्सिडी 5,000 रुपये प्रति किलोवाट घंटा थी जिसकी अधिकतम सीमा 10,000 रुपये प्रति वाहन तय थी। लेकिन एक अप्रैल 2025 से इसमें बदलाव करते हुए सब्सिडी को घटाकर 2,500 रुपये प्रति किलोवाट घंटा कर दिया गया, जिसकी अधिकतम सीमा अब 5,000 रुपये प्रति वाहन है। यानी अगर आप एक इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदते हैं जिसकी बैटरी क्षमता 2 किलोवाट घंटा है, तो आपको लगभग 5,000 रुपये तक की सीधी छूट मिल सकती है।
सब्सिडी पाने के लिए वाहन की कीमत और बैटरी से जुड़ी जरूरी शर्तें
इस सब्सिडी का फायदा हर इलेक्ट्रिक स्कूटी या बाइक पर नहीं मिलता, इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं। सबसे पहली शर्त यह है कि वाहन की एक्स फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा वाहन में लीथियम आयन जैसी एडवांस्ड कैमिस्ट्री बैटरी लगी होनी चाहिए, सीसा एसिड बैटरी वाले वाहनों को इस सब्सिडी का लाभ नहीं मिलता। साथ ही कंपनी की तरफ से वाहन पर कम से कम तीन साल या 20,000 किलोमीटर तक की वारंटी भी होनी जरूरी है। यह सब्सिडी एक व्यक्ति को सिर्फ एक ही इलेक्ट्रिक स्कूटी पर मिलती है और इसे आधार कार्ड से जोड़कर ट्रैक किया जाता है, ताकि कोई एक ही व्यक्ति बार बार इसका फायदा न उठा सके।
सब्सिडी कब तक मिलेगी और हाल में क्या बदलाव हुआ है
शुरुआत में सरकार ने यह तय किया था कि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर मिलने वाली यह सब्सिडी 31 मार्च 2026 तक ही चलेगी, क्योंकि इलेक्ट्रिक स्कूटी और बाइक का बाजार अब काफी मजबूत हो चुका है। हालांकि बाजार और खरीदारों को थोड़ी और राहत देने के मकसद से सरकार ने हाल ही में इस सब्सिडी की समय सीमा बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 तक कर दी है। मतलब अगर आप इलेक्ट्रिक स्कूटी या बाइक खरीदने की सोच रहे हैं तो आपके पास अभी कुछ और महीनों का समय है जब तक यह सब्सिडी उपलब्ध रहेगी। हालांकि इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों जैसे ई रिक्शा और ई कार्ट पर मिलने वाली सब्सिडी मार्च 2028 तक जारी रहेगी, क्योंकि सरकार चाहती है कि छोटे व्यवसाय करने वाले लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में ज्यादा समय तक सहयोग मिलता रहे।
सब्सिडी कैसे मिलती है और इसके लिए क्या करना होता है
इस योजना के तहत सब्सिडी पाने के लिए खरीदार को कोई अलग से लंबा फॉर्म भरने या दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होती। जब भी कोई व्यक्ति शोरूम या डीलरशिप से इलेक्ट्रिक स्कूटी या बाइक खरीदता है, तो वहीं पर आधार कार्ड आधारित e-KYC प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके लिए खरीदार का मोबाइल नंबर आधार कार्ड से लिंक होना जरूरी है, ताकि OTP के जरिए पहचान सत्यापित की जा सके। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद PM E-DRIVE पोर्टल के माध्यम से एक e-voucher जनरेट होता है, जिस पर खरीदार के हस्ताक्षर लिए जाते हैं और सब्सिडी की रकम तुरंत वाहन के बिल यानी इनवॉइस में ही घटा दी जाती है। इसका मतलब यह है कि ग्राहक को सब्सिडी की रकम पहले से कम कीमत के तौर पर सीधे शोरूम में ही मिल जाती है, बाद में किसी अलग रिफंड या क्लेम की झंझट नहीं करनी पड़ती।
अभी तक कितने लोगों ने इस योजना का फायदा उठाया है
इस योजना को लेकर लोगों का रुझान काफी अच्छा रहा है। जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार इस योजना के तहत कुल 22.12 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिक चुके हैं, जिनमें से करीब 19.19 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन और लगभग 2.93 लाख इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य था कि इस योजना के जरिए लगभग 24.79 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को सड़कों पर उतारा जाए, और यह आंकड़ा अब उस लक्ष्य के बहुत करीब पहुंच चुका है। इसके साथ ही कंपनियों को अब तक करीब 1,703 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि सरकार की तरफ से वापस भी की जा चुकी है।
क्या यह योजना सिर्फ केंद्र सरकार तक सीमित है या राज्यों में भी अलग लाभ मिलता है
यह समझना जरूरी है कि PM E-DRIVE एक केंद्र सरकार की योजना है, लेकिन इसके अलावा कई राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों या स्कूटी खरीद को बढ़ावा देने के लिए अलग योजनाएं चला रही हैं। जैसे उत्तर प्रदेश सरकार अपनी इलेक्ट्रिक वाहन सब्सिडी योजना के तहत अलग से लाभ देती है, वहीं कुछ राज्यों में छात्राओं या कामकाजी महिलाओं के लिए स्कूटी संबंधी विशेष योजनाएं भी चल रही हैं। इसलिए वाहन खरीदने से पहले यह जरूर पता कर लें कि आपके राज्य में केंद्र की सब्सिडी के अलावा कोई अतिरिक्त राज्य स्तरीय लाभ भी उपलब्ध है या नहीं, क्योंकि कई बार दोनों को मिलाकर खरीदार को ज्यादा फायदा मिल सकता है।
सही और भरोसेमंद जानकारी कहां से लें
इलेक्ट्रिक वाहन सब्सिडी से जुड़ी योजनाओं को लेकर इंटरनेट पर कई बार भ्रामक और गलत जानकारी भी फैलती रहती है, जिसमें अक्सर वाहन की पूरी कीमत पर 50 प्रतिशत सब्सिडी जैसे दावे किए जाते हैं जो असल योजना से मेल नहीं खाते। ऐसे में किसी भी फैसले पर पहुंचने से पहले हमेशा भारी उद्योग मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट या PM E-DRIVE के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ताजा और सही जानकारी जरूर जांच लें। डीलरशिप पर भी वाहन खरीदते समय सब्सिडी से जुड़े नियम और शर्तें एक बार खुद से कन्फर्म कर लेना बेहतर रहता है, ताकि खरीद के बाद किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


